विद्यासागर की, गुण आगर की, शुभ मंगल दीप सजायके
आज उतारूँ आरतिया (टेक)
मल्लप्पा श्री, श्रीमति के गर्भ विषै गुरु आये।
ग्राम सदलगा जन्म लिया है, सब जन मंगल गाये ।।
गुरुजी सब जन मंगल गाये,
ना रागी की, ना द्वेषी की, शुभ मंगल दीप सजायके ।
आज उतारूँ आरतिया ।। 1 ।।
गुरुवर पांच महा व्रतधारी, आतम ब्रह्म बिहारी।
खड्गधार शिव पथ पर चलकर, शिथिलाचार निवारी ।।
गुरुजी शिथिलाचार निवारी, गृह त्यागी की, वैरागी की,
ले दीप सुमन का थाल ही।
आज उतारूँ आरतिया ।। 2 ।।
गुरुवर आज नयन से लखकर, आलौकिक सुख पाया।
भक्ति भाव से आरती करके, फूला नहीं समाया ।।
गुरुजी फूला नहीं समाया, ऐसे मुनिवर को,
ऐसे ऋषिवर को, हो वन्दन बारम्बार हो।
आज उतारूँ आरतिया ।। 3 ।।
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